भारत की वायु रक्षा में नया शस्त्र
भारत ने अपनी वायु सुरक्षा क्षमता में जबरदस्त छलांग लगाई है। देश के पहले स्वदेशी VHF (Very High Frequency) रडार को अपग्रेड कर अब 500 किलोमीटर तक दुश्मन के स्टील्थ फाइटर जेट्स को पकड़ने लायक बना दिया गया है। यह उपलब्धि DRDO की Electronics and Radar Development Establishment (LRDE) और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) के सहयोग से हासिल हुई है।
पहले से कहीं ज्यादा ताकतवर

शुरुआत में यह रडार सिर्फ 400 किलोमीटर तक ही टारगेट पकड़ पाता था, लेकिन अपग्रेड के बाद इसकी क्षमता 500 किलोमीटर तक बढ़ा दी गई है। यानी अब दुश्मन का कोई भी फाइटर जेट या हवाई प्लेटफॉर्म हमारी सीमा के करीब आते ही इस रडार की पकड़ में आ जाएगा। इससे भारत की Early Warning और Surveillance ताकत और ज्यादा मजबूत हो गई है।
👉 इसका सीधा मतलब है कि पाकिस्तान या चीन के लड़ाकू विमान अब हमारी सीमा में घुसने से पहले ही ट्रैक हो जाएंगे।
कैसे काम करता है VHF रडार?
यह रडार VHF बैंड (30-300 MHz) पर काम करता है। स्टील्थ एयरक्राफ्ट जैसे अमेरिकी F-35 Lightning II या आने वाले 6th Generation Fighter Jets को आम हाई-फ्रीक्वेंसी रडार आसानी से पकड़ नहीं पाते। लेकिन VHF रडार की लंबी वेवलेंथ दुश्मन की स्टील्थ डिजाइन और रडार-एब्जॉर्बिंग मटेरियल को बेअसर कर देती है।
यानी, यह रडार उन विमानों को भी पहचान लेता है, जिन्हें खास तौर पर रडार से बचने के लिए बनाया गया है।
खासियतें जो इसे खास बनाती हैं
- 500Km रेंज से दुश्मन के एयरक्राफ्ट और मिसाइल को पकड़ने की क्षमता।
- स्टील्थ तकनीक वाले फाइटर जेट्स पर भी कारगर।
- पूरी तरह से Made in India टेक्नोलॉजी।
- भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता को मजबूती।
वायु रक्षा नेटवर्क में गेमचेंजर
यह नया VHF रडार भारत के मल्टी-लेयर्ड एयर डिफेंस सिस्टम का अहम हिस्सा बनेगा। इसे लंबी दूरी की Surface-to-Air Missiles और आधुनिक सेंसरों से जोड़ा जाएगा। इससे न सिर्फ भारत की सीमाओं की सुरक्षा बढ़ेगी, बल्कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र में भी भारत को रणनीतिक बढ़त मिलेगी।
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