देशभर में मानसून की भारी बारिश और बाढ़ ने किसानों की कमर तोड़ दी है। खेतों में खड़ी फसलें पानी में डूब गईं और सालभर की मेहनत बेकार हो गई। मध्य प्रदेश में भी सामान्य से कहीं अधिक बारिश हुई है, जिससे फसलों के साथ-साथ जान-माल का भारी नुकसान हुआ है। राज्य सरकार ने इस स्थिति को देखते हुए किसानों को आर्थिक मदद देने का बड़ा फैसला लिया है।
किसानों के लिए 20 करोड़ रुपये की राहत राशि
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन में एक अहम बैठक हुई। इसमें यह तय किया गया कि 17,500 किसानों को 20 करोड़ रुपये से अधिक की आर्थिक सहायता दी जाएगी। बैठक में मुख्य सचिव अनुराग जैन, पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। वहीं, सभी जिलों के कलेक्टर और संबंधित अधिकारी वर्चुअल माध्यम से जुड़े।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जिलों में खाद-यूरिया वितरण की व्यवस्था सुचारु रूप से की जाए। उन्होंने जिला प्रशासन से यह भी कहा कि वे किसान संगठनों के साथ लगातार संपर्क में रहें, ताकि किसानों को किसी तरह की दिक्कत का सामना न करना पड़े।
प्रदेश में 21% ज्यादा बारिश
मध्य प्रदेश में इस साल बारिश औसत से कहीं ज्यादा हुई है। 1 जून से 2 सितंबर तक प्रदेश में 971.5 मिमी यानी 38.24 इंच बारिश दर्ज की गई है, जो कि सामान्य से 21 प्रतिशत अधिक है।
राज्य के 21 जिले भारी बारिश से प्रभावित हुए हैं। इनमें भिंड, छतरपुर, श्योपुर, ग्वालियर, नीमच, मुरैना, शिवपुरी, अशोकनगर, अलीराजपुर, सिंगरौली, राजगढ़, मंडला, सीधी, टीकमगढ़, गुना, नरसिंहपुर, दतिया, रतलाम, उमरिया, रायसेन और सिवनी शामिल हैं। इनमें से गुना, मंडला, श्योपुर, रायसेन और अशोकनगर सबसे ज्यादा प्रभावित जिले रहे।
बाढ़ से भारी नुकसान
इस बार की बाढ़ और अतिवृष्टि ने प्रदेश में बड़ी तबाही मचाई है।
- अब तक 394 लोगों की मौत हो चुकी है।
- 5000 से ज्यादा मकान बाढ़ में क्षतिग्रस्त हुए हैं।
- करीब 1814 पशुओं की मौत हुई है।
- 12,000 हेक्टेयर कृषि भूमि पर खड़ी फसलें पूरी तरह बर्बाद हो गईं।
सबसे ज्यादा नुकसान शिवपुरी, बुरहानपुर, दमोह, अशोकनगर, धार, छतरपुर, रायसेन, उमरिया, बड़वानी, मंडला और कटनी जिलों में हुआ है।
फसल बीमा योजना से भी मिलेगा मुआवजा
सरकार ने किसानों को यह भरोसा दिलाया है कि सिर्फ राहत राशि ही नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के तहत भी किसानों को क्लेम मिलेगा। जिन किसानों ने खरीफ सीजन में बीमा कराया है, उन्हें नुकसान की भरपाई बीमा कंपनियों से की जाएगी।
लेकिन इसके लिए जरूरी है कि प्रभावित किसान 72 घंटे के भीतर बीमा कंपनी, कृषि विभाग या फिर हेल्पलाइन नंबर पर सूचना दें। तभी उनका क्लेम समय पर पास हो सकेगा।
किसानों को बड़ी राहत
भारी बारिश और बाढ़ ने इस बार किसानों की मुश्किलें कई गुना बढ़ा दी हैं। ऐसे में सरकार का 20 करोड़ रुपये की राहत और बीमा क्लेम की सुविधा किसानों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकती है। राज्य सरकार का दावा है कि किसानों को हर संभव मदद दी जाएगी, ताकि वे दोबारा खेती में जुट सकें और उनके जीवन पर संकट न आए।
