शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने 1 सितंबर को एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। कोर्ट ने साफ कहा है कि अब कक्षा 1 से 8 तक पढ़ाने वाले सभी शिक्षकों के लिए टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (TET) पास करना अनिवार्य होगा। यह आदेश सरकारी, प्राइवेट (गैर-अल्पसंख्यक) और कुछ हद तक अल्पसंख्यक स्कूलों पर भी असर डालेगा।
⚖️ सुप्रीम कोर्ट की बेंच का फैसला
जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस ऑगस्टिन जॉर्ज मसीह की बेंच ने माना कि बिना TET पास किए पढ़ाने वाले शिक्षक बच्चों की गुणवत्ता पर असर डालते हैं। यही वजह है कि अब हर शिक्षक को इस परीक्षा से गुजरना होगा।
कोर्ट ने कहा –
👉 “20 साल से पढ़ा रहे शिक्षकों को भी अब TET पास करना होगा। केवल अनुभव शिक्षा की गारंटी नहीं दे सकता।”
👨🏫 किन शिक्षकों को मिलेगी राहत?
- जो शिक्षक 5 साल से अधिक सेवा दे चुके हैं, उन्हें आंशिक राहत मिल सकती है।
- ऐसे शिक्षक चाहें तो रिटायरमेंट लेकर सेवा लाभ (Terminal Benefits) ले सकते हैं।
- लेकिन जिनकी सेवा लंबी बाकी है और उन्होंने TET पास नहीं किया है, उन्हें या तो परीक्षा पास करनी होगी या फिर नौकरी छोड़नी होगी।
🏫 किन पर होगा असर?
- सरकारी स्कूल
- अब नई नियुक्ति सिर्फ उन्हीं की होगी जिन्होंने TET पास किया है।
- पुराने शिक्षक जो बिना TET पढ़ा रहे थे, उन्हें या तो क्वालीफाई करना होगा या नौकरी छोड़नी होगी।
- प्राइवेट (नॉन-माइनॉरिटी) स्कूल
- यहां भी अब TET पास करना अनिवार्य होगा।
- स्कूल प्रबंधन मनमाने तरीके से कम योग्यता वाले शिक्षक नियुक्त नहीं कर पाएंगे।
- अल्पसंख्यक स्कूल
- फिलहाल इस पर अंतिम निर्णय नहीं हुआ है।
- मामला सुप्रीम कोर्ट की बड़ी बेंच को भेजा गया है।
🎯 फैसले का मकसद
इस फैसले का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कक्षा 1 से 8 तक पढ़ाने वाले हर शिक्षक में बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने की क्षमता हो।
👉 यह फैसला उन शिक्षकों के लिए झटका है जिन्होंने बिना TET के लंबे समय से नौकरी कर ली थी, लेकिन छात्रों के भविष्य को देखते हुए यह कदम शिक्षा व्यवस्था को और मज़बूत बनाने वाला साबित हो सकता है।
