कौन थे चार्ली किर्क?
चार्ली किर्क को अमेरिका में दक्षिणपंथी रिपब्लिकन आंदोलन की नई पीढ़ी का सबसे बड़ा चेहरा माना जाता था। वे राष्ट्रपति ट्रंप के बेहद करीबी थे और अक्सर उनकी नीतियों और विचारों का समर्थन करते थे। अमेरिकी राजनीति में उन्हें युवाओं के बीच कंजरवेटिव आइकन कहा जाता था।
चार्ली ने कम उम्र से ही राजनीति में दिलचस्पी लेना शुरू कर दिया था। वह शिकागो के उपनगरीय इलाके से ताल्लुक रखते थे। खास बात यह रही कि उन्होंने किसी विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई पूरी नहीं की, लेकिन किशोरावस्था से ही वे सार्वजनिक जीवन और राजनीतिक सक्रियता में कूद पड़े। धीरे-धीरे वे रिपब्लिकन पार्टी और ट्रंप कैंप के सबसे भरोसेमंद चेहरों में गिने जाने लगे।
Turning Point USA की स्थापना

साल 2012 में, महज 18 साल की उम्र में चार्ली किर्क ने Turning Point USA नाम का संगठन शुरू किया। यह संगठन कॉलेज और यूनिवर्सिटी के छात्रों के बीच कंजरवेटिव विचारधारा को फैलाने के लिए काम करता था। अगले कुछ सालों में यह संगठन युवाओं की आवाज़ बन गया और राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली।
इसके बाद उन्होंने Turning Point Action भी शुरू किया, जिसे डोनाल्ड ट्रंप ने 2020 के चुनावों के दौरान “घर-घर जाकर मतदाताओं तक पहुंचने” की जिम्मेदारी दी थी।
ट्रंप के बेहद करीबी

चार्ली किर्क का डोनाल्ड ट्रंप से बेहद नजदीकी रिश्ता था। साल 2016 तक वे ट्रंप के बेटे डोनाल्ड ट्रंप जूनियर के निजी सहायक के तौर पर काम कर रहे थे। ट्रंप परिवार से इस नजदीकी ने उन्हें सीधे रिपब्लिकन राजनीति के केंद्र में ला खड़ा किया।
साल 2020 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनावों में जब ट्रंप ने चुनावी धांधली का दावा किया, तो चार्ली किर्क भी उनके समर्थन में खड़े हुए। उस दौरान उन्होंने ट्रांसजेंडर समुदाय और प्रवासियों को लेकर भी विवादास्पद बयान दिए, जिसकी काफी आलोचना हुई। इसके बावजूद, ट्रंप समर्थक युवाओं में उनकी लोकप्रियता लगातार बनी रही।
ट्रंप का भावुक बयान
चार्ली किर्क की हत्या पर डोनाल्ड ट्रंप ने गहरा दुख जताया। उन्होंने कहा –
“चार्ली किर्क ने जिन अमेरिकी मूल्यों के लिए जीवन जिया और प्राण दिए, हमें उन पर और दृढ़ रहना होगा। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, कानून का शासन और ईश्वर के प्रति समर्पण उनके जीवन की पहचान थी।”
ट्रंप का यह बयान साफ दिखाता है कि चार्ली सिर्फ एक कार्यकर्ता नहीं थे, बल्कि ट्रंप के राजनीतिक सफर में एक अहम सहयोगी भी थे।
कैसे हुई हत्या?
चार्ली किर्क अक्सर अमेरिकी विश्वविद्यालयों में जाकर भाषण देते थे और छात्रों को खुले मंच पर डिबेट के लिए आमंत्रित करते थे। उनके कई डिबेट सोशल मीडिया पर वायरल भी हुए थे।
बुधवार को यूटा वैली यूनिवर्सिटी में हुए एक ऐसे ही कार्यक्रम के दौरान अचानक हिंसा भड़क गई और गोलीबारी हो गई। इसी दौरान चार्ली की गर्दन पर गोली लगी और मौके पर ही उनकी मौत हो गई। इस वारदात ने अमेरिका के राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। विपक्ष और सत्ता पक्ष दोनों ने इस हत्या की कड़ी निंदा की है।
नतीजा
चार्ली किर्क की मौत ने अमेरिका की राजनीति में गहरी खामोशी छोड़ दी है। उन्हें न सिर्फ एक कार्यकर्ता, बल्कि कंजरवेटिव युवाओं के आवाज और चेहरे के रूप में याद किया जाएगा। उनकी हत्या को कई लोग अमेरिकी राजनीति और लोकतांत्रिक मूल्यों पर सीधा हमला बता रहे हैं।
👉 अब सवाल यह है कि ट्रंप कैंप और रिपब्लिकन पार्टी उनके बिना युवाओं तक अपनी बात कितनी मजबूती से पहुंचा पाएगी।
✍️ शब्द संख्या: ~505
